सोमवार, 2 मई 2011

Gen. Shankar Roy Chowdhury

General Shankar Roychowdhury ,

 कश्मीर की समस्याओ पर अपनी बेबाक राय देते हुए

१. कश्मीर में आजादी की मांग बहुत जोर शोर से उठाई जा रही है क्यों ?
*आजादी की मांग कश्मीर में नहीं उठाई जा रही है ,कश्मीर बोलना गलत है क्योकि इसमें जम्मू व् लद्दाख का क्षेत्र भी आता है ,जंहा शांति है .ये मांग कश्मीर घाटी की है .उस घाटी में अलग अलग लोग निवास करते है जैसे गुजर व् बकरवाल आदि इनमे से बहुत से लोग इस तरह की मांग में शामिल नहीं है.वंहा पर कश्मीरी सुन्नी मुस्लिम विभिन्न पार्टियों या जेहादियों के बहकावे में आकर इस प्रकार की मांग कर रहे है .
२.आजादी का मतलब क्या है ,ये किस प्रकार की आजादी की मांग कर रहे है ,भारत से अलग होकर स्वतन्त्र अस्तित्व की मांग या पाकिस्तान में मिलना चाह रहे है.
* ये प्रत्येक दल के नेता के ऊपर निर्भर होता है की वह क्या चाहता है .जैसे तहरीक -ऐ -हुर्रियत के नेता गिलानी की मांग पाकिस्तान के साथ जाने की है .प़ीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती सेल्फ रुल (हिंदुस्तान व् पाकिस्तान के प्रभाव से अलग  अपना वजूद) चाहती है .जमात -ऐ -इस्लामी के नेता मीरवायज उमर फारुख अब्दुल्ला की मांग 'आजादी' भारत से अलग होना है .वो पाकिस्तान के साथ जा भी सकते है और स्वंतंत्र भी रह सकते है .नेशनल कांफेरेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला व् कश्मीर के  मुख्य  मंत्री उमर अब्दुल्ला भारत के साथ है .
३. लेकिन आजादी की मांग आज घाटी के बड़े से लेकर बच्चे तक कर रहे है क्यों ?
*रोज रोज की होने वाली हिंसा से तंग आकर आम जनता शांति चाहती है ,वो शांति सुकून से कमाना खाना चाहती है .उनकी आजादी की मांग का मतलब होने वाली हिंसा से मुक्ति की चाह है .
४. नेशनल कांफेरेंस के नेता औटोनामी 'स्वायत्ता' की मांग कर रहे है. क्यों ?
*नेशनल कांफेरेंस के नेता औटोनामी की मांग कर रहे है ठीक है ,उन्हें जो भी कुछ चाहिए संविधान के अन्दर रहकर ही उसकी मांग कर
 सकते है और सरकार जो भी कुछ देना चाह रही है संविधान के तहत ही दे .
५. क्या कश्मीर घाटी का मुद्दा बहुत गंभीर है ,इसलिए इसे यु ऐ ऍन को सौपा गया है?
*   भारत ने कई गलतिया की है जिसमे से एक कश्मीर घाटी के मुद्दे को सौपना  भी है .ये भारत के अन्दर की समस्या थी तो इसे भारत को ही सुलझाना चाहिए था .
६. आपके अनुसार भारत ने कई गलतिया की है क्या आप उनमे से एक दो बता सकते है ?
*बाकी की गलतियों की बात छोड़ दीजिये वर्तमान में वो जो गलती कर रहा है वो ये है की अलगाववादी नेताओ को बार- बार पाकिस्तान भेज कर कश्मीर की समस्या को बात चीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश. भारत सरकार को तो ऐसे लोगो का पासपोर्ट जब्त कर लेना चाहिए था जो पाकिस्तान इस समस्या को सुलझाने के लिए नहीं जाते, वरन वंहा से नए -नए फार्मूले कश्मीर में उपद्रव मचाने के लिए सीख कर आते है.
७. कश्मीर घाटी से फ़ौज हटाने की बात करते है क्या फ़ौज हटाना समस्या का समाधान है ?
* फ़ौज पाकिस्तान या घाटी के हुक्म से तो हटेगी नहीं .अगर पार्लियामेंट समझती है की कश्मीर की समस्या का समाधान फ़ौज हटाना है तो वो इस बारे में चर्चा करेगी .
८. कश्मीर घाटी से फ़ौज हटाना क्या इतिहास दोहराना नहीं होगा .जिस प्रकार अक्टूबर १९४७ में कश्मीर के राजा हरी सिंह को हराकर कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने गोरिल्ला युद्ध किया था वो भी तब जब राजा हरी सिंह स्वयम बटवारे के समय पाकिस्तान के साथ जाने वाले थे .इसका नतीजा  ये हुआ की वो पाकिस्तान की हरकत देखकर भारत के साथ आ गए और तब उन्होंने पाकिस्तान को खदेड़ने के लिए भारतीय फ़ौज की मदद ली ?
*ये बिल्कुल सही है अगर वहा से फ़ौज हटती है तो पाकिस्तान कश्मीर को ही नहीं बहुत कुछ खा जायेगा .
९. सी आर पी एफ जो कश्मीर में तैनात है उसके बारे में आपकी कोई राय ?
* सी आर पी एफ व् उसके कमान्डेंट को और ट्रेनिंग की आवश्यकता है इसके अतिरिक्त उन्हें आराम देने की भी जरुरत है .क्योकि कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक जहा कही भी झमेला होता है सी आर पी एफ भेज दी जाती है .यही वजह है की उनलोगों ने अपना बंद बनाया है जिसकी धुन है 'चलते रहो प्यारे ' इसलिए मेरा मानना है कि उन्हें आराम कि आवश्यकता है वो बहुत खींचे हुए है .
१०.  इन सबका समाधान क्या है?
*इन सबका एक ही समाधान है जो भी मांग है आजादी ,औटोनामी इनकी पूर्ति संविधान के अन्दर ही रहकर होनी चाहिए .constitution  के बहर कुछ भी नहीं .दूसरी बात दिल्ली सरकार का रुख बहुत नरम है जो सही नहीं है. उसमे सुधार होना चाहिए .
जनरल शंकर राय चौधुरी अपनी पत्नी के साथ  'द वेक ' मैगजीन   के लिए interview  देते हुए.






Gen. Shankar Roy Chowdhury

 


General Shankar Roychowdhury (General S. Roychowdhury) (born September 6, 1937, Kolkata) served as 18th Chief of Army Staff of the Indian Army from 22 November 1994 to 30 September 1997.
An alumnus of St. Xavier's Collegiate School, Kolkata, he has received the Param Vishisht Seva Medal for distinguished service to the Indian Army and to the nation.
He also became member of Rajya Sabha after his retirement

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

Nizamuddin Butt MLA (PDP) Kashmir

निजामुद्दीन बट्ट  विधायक बांदीपोरा   कश्मीर ,,,,,,,
१. क्या ये सही है की जो लोग कश्मीर में शांति से रहना चाहते है उन लोगो को चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम उन्हें कश्मीर से भगाया जा रहा है ?
*बिलकुल गलत है .जो लोग इस तरह के इल्जामत लगा रहे है वे गलत कर रहे है .उनकी क्या मंशा है इसके बारे में कुछ नही कहा जा सकता .लेकिन हमने नहीं सुना की कोई हुर्रियत कांफेरेंस या militant के डर से कश्मीर छोड़ कर भाग रहा है .हमारी उनकी पार्टिया अलग है वे हमारे बारे में बहुत कुछ बोलते रहते है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि अगर कोई उनपर गलत इल्जाम लगाये तो हम उसका साथ दे .ये भगाने वाली बात जो उठ रही है ये सही नहीं है इसके पीछे जरुर कोई बदनीयती है .
2. कश्मीरी हिन्दुओ को कश्मीर से भगाया गया उसके लिए घाटी के लोग व आपकी पार्टी क्या कर रही है ?
*हम लोग उनको वापस बुलाना  चाहते है .हम सभी चाहते है की कश्मीरी पंडित वापस आ जाये .फिर से हम सब एक साथ मिलजुल कर रहे जैसे की पहले रहते थे .लेकिन उनके अन्दर इतना डर समाया हुआ है कि वे वापस नहीं आना चाहते .
३. आप लोग उन्हें वापस बुलाना चाहते है ,लेकिन बिना सुरक्षा , सुविधा और रोजगार  के वे वापस आकर क्या करेंगे ?
*देखिये सुरक्षा का ठिकाना यहाँ किसी का नहीं है ,कोई भी कश्मीर में सुरक्षित नहीं है .वैसे भी  सुरक्षा सुविधा और रोजगार देने का काम सरकार का है हम तो यही कह सकते है कि आम मुस्लिम बिरादरी उनका समर्थन कर रही है .
४.क्या अभी भी militancy  है ?
*है लेकिन बहुत कम. हम जिस जगह रहते है वहा अभी भी थोड़े हिन्दू है हम सभी एकसाथ आराम से रह रहे है .दिल का खौफ तभी निकलेगा जब आप रहेंगे .आप गुजरात को देखिये गोधरा कांड के बाद वहा दंगा हुआ लेकिन क्या मुस्लिम समाज ने वहा रहना छोड़ दिया ,वे आज भी रह रहे है और शांति से रह रहे है .आज की तारीख में गुजरात सबसे अधिक विकसित राज्य है .
५.इन्हें वापस बुलाने के लिए क्या करना चाहिए .
*इनके संगठन के लोगो को तय करना चाहिए की  वे  वापस जाकर अपने घर में रहे.मुस्लिम समुदाय की तरफ से इन्हें पूरा सहयोग व समर्थन मिलेंगा.
६. बीस वर्षो के बाद भी लगभग चालीस हजार कश्मीरी हिन्दू कैम्पों में खस्ताहाल हालत में  रहने के लिए मजबूर है क्योकि उनके लिए कुछ किया नहीं जा रहा है .ऐसा क्यों ?
* ये दोष केंद्र सरकार का है .उन्हें घर केंद्र सरकार देंगी न की राज्य सरकार लेकिन केंद्र सरकार राज्य पर दबाव बनाती है की राज्य सरकार उनके लिए घर की व्यवस्था करे .
७.आप उन हिन्दुओ के लिए क्या कहना  चाहते है जिन्हें जबरदस्ती डरा धमका के पलायन करने के लिए मजबूर किया गया .
*हम  मानते है की उनके साथ जो हुआ वो गलत था .लेकिन हम यही विश्वास दिलाना चाहेंगे कि दिल हमारे खुले हुए है ,हम उनका स्वागत करेंगे और चाहेंगे कि वे लोग आकर यंहा सुख शांति से मेल मिलाप के साथ रहे, काम करे. देश उन्नति करे .हमारी पार्टी ने कैंसर विशेषग्य डा. समीर कौल को  पार्टी प्रवक्ता बनाया है .हम लोगो कि यही चेष्टा है कि सब एक साथ रहे .


निराशा हाथ लगी ये कहना है कुछ कश्मीरी मुस्लिम का ........

खुले आसमान के नीचे भोजन की व्यवस्था 


अस्थायी ठिकाना 
कुछ महीने पहले कश्मीर से तक़रीबन हजार लोग कोलकाता आये .उन्होंने   शाल ,  शलवार सूट और कालीन बेचने का काम आरम्भ किया .किन्तु कोलकाता  में गर्मी अधिक होने के कारण उनका काम ठीक से चल नहीं सका .कोई ठोस व्यवस्था व् स्थायी रोजगार न होने की वजह से उन्हें खाने पीने की परेशानी  का सामना करना पड़ा .उनकी खस्ता हालत  देख कर अगल बगल में रहने वालो ने  उनकी मदद की और उन्हें सलाह दी की वे ऍन जिओ (गैर सरकारी संगठन ) के पास जाये और उनसे मदद मांगे .वे लोग कई एनजीओ के पास मदद के लिए गए  .उन्हें मदद भी मिली .प्रेस वालो ने भी उनकी बाते सुनी ,कुछ ने छापा भी .फिर पता चला की उनमे से काफी लोग कश्मीर वापस चले गए .जो बच गए है वे भी जा रहे है .हमने भी उनसे मुलाकात की .तो उनमे से कुछ लोगो ने बताया की वे बारामुला के रहने वाले है .उनको अपना देश इस लिए छोड़ना पड़ा क्योकि उन्हें वहा हुर्रियत कांफ्रेंस के लोग और पाकिस्तान से आने वाले militant  परेशान कर रहे थे उनको वहा जान का खतरा था इसलिए लगभग १०,००० लोग कश्मीर से निकल कर बड़े बड़े शहरो में बस गए ..जब उनसे पूछा की अब वे अगर वापस जायेंगे तो क्या उन्हें जान मॉल का खतरा नहीं होगा .इसपर उन्होंने जवाब दिया की कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने उनके रहने के लिए घरऔर काम की व्यवस्था की है .जहा वे लोग जाकर शांति से रहेंगे बात करते समय वे बार बार पूछ रहे थे की आप प्रेस से तो नहीं आप इसे कही छापेंगे तो नहीं क्योकि ये उन्हें परेशानी में डाल सकता है और हो सकता है की इससे उनकी जान पर भी बन आये .
उनके साथ हुयी मुलाकात ने कुछ सवाल खड़े कर दिए की क्या ये जो कह रहे है सही है , अगर ऐसा है तो कश्मीर में सुरक्षित कौन है .और अगर १०,००० लोग कश्मीर से निकले तो इसकी खबर मिडिया में क्यों नहीं आई .उन्ही सवालों के जवाब के लिए कश्मीर के बांदीपुरा जिले के विधायक  निजामुद्दीन बट  से बात की उनसे हुयी बात के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत है ......






रविवार, 3 अप्रैल 2011

Bengal in the mirror of History

इतिहास के आईने में बंगाल .....
१. डा. विधानचंद्र राय 'मुख्य मंत्री बंगाल (१९४७-६२) के समय में भयंकर अकाल पड़ा था .
२. "बंगला कांग्रेस से अजय कुमार मुख़र्जी १९६७ में मुख्य मंत्री बने .
३. १९६७ में नाक्साल्बरी गाँव से विद्रोह आरम्भ हुआ जिसका चारू मजुमदार व् कानू सान्याल (सिपिआइअम ) ने नेतृत्व किया .किन्तु उस समय की बंगाल सरकार ने  इस सख्ती से दबा दिया .
४. १९६९ के चुनाव में सी पी एम बड़ी पार्टी के रूप में उभरी .अजय कुमार मुख़र्जी को फिर से मुख्य मंत्री बना दिया गया .१६ मार्च १९७० में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और बंगाल में प्रेसिडेंट रूल लागु कर दिया गया .
५. सिद्धार्थ शंकर राय (कांग्रेस १९७२-१९७७  )१९७२ में मुख्यमंत्री बने ,मुख्य विपक्षी दल सी पी आई एम ने शपथ समारोह का बहिष्कार किया ये कहते हुए की चुनाव में धांधली हुयी है .
६.१९७५ ,में इंदिरा गाँधी ने पुरे देश में इमरजेंसी लागु कर दी .१९७५-१९७७ तक पुलिस व्  नक्सलियो के बीच में में जबरदस्त हिंसा .
७. १९७७ के चुनाव में सी पी एम ने २४३ सीट  जीत  कर विशाल जीत दर्ज की .स्व. ज्योति बासु मुख्य मंत्री बने .१९७७-२०००.
८. २००० से अभी तक बुद्धदेब भट्टाचार्य मुख्यमंत्री के रूप में अभी तक शासन की कमान सम्हाले हुए है .
सी पी एम की कुछ भूले जिसने त्रिनमुल कांग्रेस के अस्तित्व को रौशनी दी .
१. सिंगुर : पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगुर ग्राम में टाटा नैनो कार के कारखाने को लगाने की योजना को अमली जमा पहनाने के लिए बंगाल सरकार ने ९९७ एकर जमीन किसानो से खरीदना चाही जिसका जमीन मालिको ने विरोध किया उनके इस आन्दोलन में त्रिनमुल कांग्रेस की अध्यक्षा ममता बनर्जी ने साथ दिया . अंत में रतन टाटा को सिंगुर छोड़ कर गुजरात जाना पड़ा .
२. १४ मार्च २००७ में बंगाल सरकार ने स्पेशल इकोनोमिक जोन (सेज) इंडोनेशिया में रहने वाले सलीम ग्रुप के साथ मिलकर केमिकल हब बनाने की योजना को वास्तविक रूप देने के लिए १०.००० एकर जमीन किसानो से खरीदने की कोशिश की जिसका विरोध बड़े पैमाने पर हुआ .इस विरोध को दबाने के लिए ३,००० की संख्या में पुलिस फ़ोर्स उतारी गयी जिसमे जम कर हिंसा हुयी १४ लोगो की मौत हो गयी ७० के लगभग लोग घायल हो गए .इसने वामपंथियो की छवि को बहुत जायदा ख़राब कर दिया .अंत में इस योजना को भी ठन्डे बस्ते  में ड़ाल दिया गया .
३. १९४८-१९६२ में पश्चिम बंगाल उद्योगों की नगरी कहा जाता था .बंगाल के प्रथम मुख्यमंत्री विधानचंद्र राय ने बड़े बड़े उद्योग ,दुर्गापुर, आसनसोल ,कल्याणी ,howrah  और कोलक़ता में लगवाये थे .१९६० -७० के दशक में उद्योगों की संख्या कम होने लगी जिसका  कारण नक्सली हिंसा ,बंगलादेश युद्ध व् सी पी एम की नीतिया बताई जाती है. 

गुरुवार, 31 मार्च 2011

Moti Kaul "President ,All India Kashmiri Samaj

राष्ट्रीय कश्मीरी सभा के अध्यक्ष ,मोती कौल के साथ  विशेष वार्तालाप,,,
 १.आप राष्ट्रीय कश्मीरी सभा के अध्यक्ष है ,आपने कश्मीरी हिन्दुओ के पलायन को रोकने के लिए क्या किया?
* हमने केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार तक कश्मीरी हिन्दुओ के पलायन को रोकने के लिए बहुत बार बात की मदद मांगी किन्तु इस पर कभी विचार ही नहीं किया गया .
२. आपकी बात पर विचार न किया जाना इसका क्या कारण है ?
*इसका सीधा सा कारण है कश्मीरी हिन्दुओ का न्यूनतम आकडा जो किसी भी नेता को सत्ता दिलाने में वोट बैंक साबित नहीं हो सकता . इसी लिए सभी सत्ता धारी आपनी कुर्सी बचने के लिए  मुस्लिम समुदाय को लुभाने में लगे रहते है .
३.कश्मीर में हिन्दू अल्पसंख्यक है ,क्या उनके हितो की रक्षा के लिए भी ऐसी कोई योजना आरम्भ की गयी है जैसी की भारत के बाकि प्रदेशो में मुस्लिम समुदाय के हितो व् अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए लागु की गयी है?
* इस पर भी हमने सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की किन्तु कोई  बात नही  बनी . 
४. इसके आलावा भी कोई कारण जो आप लोगो को आपके अधिकार दिलाने में बाधक है ?
*सहनशीलता और शांतिप्रिय स्वभाव जो कश्मीरी हिन्दुओ का ही नहीं वरन समस्त हिन्दुओ का स्वभाव है जिसे लोग कायरता या कमजोरी समझ लेते है .यही सबसे बड़ी बाधा है हिन्दुओ को उनके अधिकार दिलाने में .
५.आजकल अलगाववादी नेता कश्मीरी हिन्दुओ को कश्मीर वापस बुलाने की बात कर रहे है ,आपका इस बारे में क्या ख्याल है ?
* कहने से क्या होता है ,सुरक्षा ,सुविधा ,सही वातावरण इनकी आवश्यकता होती है. जब ये ही नहीं मिलेंगे तो वहा क्या खुद को मौत के मुंह  में धकेलने जायेंगे .वैसे भी कश्मीरी हिन्दुओ को बुलाने की पहल १-२ साल से ही शुरू हुयी है .वो भी तब जब कश्मीर की स्थिति और हिन्दुओ के पलायन पर पश्चिमी देशो ने आलोचना करना आरम्भ कर दी  यहाँ तक की उन्होंने भारत के सेकुलर होने पर भी प्रश्न लगा दिया.
६. कश्मीर से साढ़े तीन लाख हिन्दुओ ने १९९० में पलायन किया था .क्या सरकार ने सभी को घर व् रोजगार मुहैया करा दिया ?
* सबसे बड़ी पीड़ा यही है की सरकार ने ऐसी कोई सुविधा कश्मीरी हिन्दुओ को बसाने के लिए नहीं दी  अभी भी तीस -चालीस हजार के लगभग लोग बीस वर्षो से खस्ताहाल स्थिति में शिविरों में स्वदेशी शरणार्थी बन कर रहने के लिए मजबूर है .उनके लिए न केंद्र सरकार चिंतित है न राज्य सरकार .
७.आजकल गैर सरकारी संगठन जरूरतमंद लोगो की बहुत मदद करते है फिर इन चालीस हजार लोगो की मदद क्यों नहीं की गयी ?
* अधिकतर संगठन सीधे कश्मीर जाते है उन्हें जम्मू के तम्बुओ में समाये ये शरणार्थी नहीं दीखते हा छोटे छोटे संगठन कभी कभार दिख जाते है .
८. मीडिया की समाज में काफी अहम् भूमिका है फिर उन्हें   बीस वर्षो से अपने घर को तरसते ये शरणार्थी  क्यों नहीं  दिखते  ?
* शायद हम लोग मीडिया के सांचे  में फिट नहीं है इसी लिए वे लोग हमारे बारे में कभी कभार ही लिखते है.
९.आपको क्या लगता है क्या भारत कश्मीर को खो देंगा ?
*भारत के सामने सिर्फ कश्मीर अकेले की समस्या नहीं है ,दक्षिण भारत ,पूर्वी भारत भी बिखराव की स्थिति में है .अगर समय रहते समस्याए नहीं सुलझाई तो आने वाले दिनों में भारत बहुत कुछ खो देंगा .
१०. आप  कश्मीरी  समाज के लिए क्या करना चाहते  .
* उनके अधिकार उन्हें  dilana chahta hu जो  लोग कश्मीर से बाहर बस गए है उन्हें उनकी संस्कृति और भाषा से जोड़ना chahta hu .क्योकि अपनी जड़ो से दूर जाना ही किसी भी समाज के लिए पतन का कारण बनता है .

" द  वेक " पत्रिका के साथ


मंगलवार, 29 मार्च 2011

Singer Kalpana "Ishak se meetha kuchh bhi nahi"

इशक से मीठा कुछ भी  नहीं (आक्रोश ) रंग चढ़ा है रंग चडेगा (खट्टा - मीठा)  जेसे गानों से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वाली व् "हमसे भंगिया न पिसाई ऐ गणेश के पापा "  लोकप्रिय  भजन  व्  लोकगीतों  के द्वारा बिहार -झारखण्ड के दिलो पर राज करने वाली गायिका कल्पना से खास मुलाकात व् खास बाते ..........

  1. आप गायन के क्षेत्र में  है ,लोकप्रिय भी है ,निसंदेह ये आपका सपना रहा होगा ? 
  • गायन मेरा सपना नहीं था ,मैंने जब इसे सीखा था तब मुझे ये पता भी नहीं था की एक दिन ये मेरी रोजी रोटी का साधन बन जायेगा और मुझे इतनी ख्याति दिलाएगा . 
  • क्या आपकी माता जी भी संगीत से जुडी हुयी है ?
  • मेरी माँ बी एस नल की कर्मचारी है ,और उन्होंने नोकरी  करने के लिए बहुत मेहनत की इसलिए वो हमेशा ऊँची शिक्षा दिलाने के पक्ष में रहती थी .उनका मानना है की लड़की के लिए शादी से ज्यादा जरुरी है आर्थिक निर्भरता .
  • आपके माता पिता की विचारधारा में बहुत अंतर है क्या इससे कभी टकराव की  स्थिति भी बनी ?
  • अक्सर दोनों लोगो ,में  मेरी शिक्षा और संगीत को लेकर मतभेद रहते थे .क्योकि मेरे पिताजी मुझे संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा दिलाने के लिए अक्सर स्कूल जाना बंद करवा देते थे जो माँ को पसंद नहीं आता  क्योकि मै  पढाई में बहुत अच्छी थी .
  • आपने कहा तक शिक्षा प्राप्त की ?
  • मैंने गुवाहाटी के काटन कालेज से बी ऐ अंग्रेजी ओनोंर्स लेकर किया था लेकिन ऍम ऐ नहीं कर सकी इसका मुख्य कारण असम में संगीत के क्षेत्र में अपनी जबरदस्त पहचान बना लेना .इसलिए समय ही नहीं मिला .हा एक बात जरुर बताना चाहूंगी कि मै विज्ञानं कि छात्रा थी लेकिन जब कालेज में admission कि बात चल रही थी तब मेरी माँ ने ही कहा कि इसे आर्ट लेकर पढना चाहिए क्योकि ये विज्ञानं के लिए इतना समय नही दे पायेगी .हमें भी इतनी समझ नहीं थी कि अपनी इच्छा को महत्व देना चाहिए जो कहा वो मान लिया .
  • अपने अनेक भाषाओ  में गाने गए है ,क्या आपको कई भाषाए आती है ?
  • हमने बाईस भाषाओ में गाने गाए है क्योकि मुंबई में टिकने के लिए पैसा बहुत जरुरी है इसलिए जिसने जिस भाषा में गाने को कहा हमने गाया लेकिन हमें बोलनी नहीं आती .
  •  आप बॉम्बे कैसे पहुंची ?
  • असम और बंगाल की पिक्चरो के लिए हमने बहुत से गाने गाये  है .वहा के लोगो ने सलाह दी की हमें मुंबई जाना चाहिए .मुंबई जाने के लिए एक सहारे की आवश्यकता थी इसलिए सबसे पहले हमने शादी की फिर मुंबई गए .
  • शादी अपने माता पिता की मर्जी से की ?
  • नहीं ,ये मेरी पसंद थी शायद बचपन का प्यार था जो बाद में शादी में बदल गया .
  • मुंबई में खुद को ज़माने में कितनी दिक्कत आई ?
  • आरम्भ के दस दिन तो हमने रो रो कर गुजारे  , मुंबई का माहोल ,जीवन शेली ,सब कुछ अलग था उससे सामंजस्य बिठाना आसान  बात नहीं थी .तब तबला वादक विक्रम घोष की पत्नी जयासिल (तब तक  शादी नहीं हुयी थी )ने बहुत मदद की .उसने समझाया की मुंबई में नाम और दौलत दोनों है .
  • आपका गाया  हुआ पहला लोकप्रिय गाना कोंन सा था ?
  • टाइम्स म्यूजिक के लिए पहला रीमिक्स गाना गया ( आशा भोसले द्वारा गाया )माय heart इस  वीपिंग .
  • आपका  नाम लोकगीतों से आधिक हुआ ऐसा क्यों ?
  • मझे लोकगीत गाना उतना पसंद नहीं है जितना की पश्चिमी तर्ज पर बने हुए गाने गाना .लेकिन संघर्ष के दौरान    जिसने जो कहा मैंने वो गाया क्योकि पैसे की आवश्यकता के सामने पसंद -नापसंद नहीं चलती .इसका दुष्परिणाम ये हुआ की लोगो ने दुआर्थी गाने भी मुझसे  गवाये  चूकि  मुझे भाषा नहीं आती थी इसलिए जब तक पता चलता तब तक बहुत देर हो जाती .
  • आपको कैसे गाने पसंद है ?
  • मुझे दुःख के गाने बिलकुल पसंद नहीं है .ये ठीक है की मैंने भोजपुरी में विदाई के गाने बहुत गाये है .लेकिन वो मेरा पेशा है .पसंद नहीं .
  • क्या आप भी विश्वास करती है कि लड़के और लड़की के संघर्ष में बहुत फर्क है ?
  • बिलकुल सही है .लड़का कही भी जायेगा कोई चिंता नहीं करता न कुछ कहता है लेकिन उसी जगह लड़की को अगर बाहर जाना है तो दस तरह  कि बाते होती है .हम चार बहने है जब हम असम में थे तो अक्सर लोग रात में पत्थर फेकते थे जिसने मेरा आत्मविश्वास ख़त्म कर दिया था.मुंबई जाने के पहले मैंने शादी इसी लिए कि थी जिससे कोई मेरी हिम्मत बढ़ा सके .
  • कौन सी ऐसी बात है जो आपको सबसे ज्यादा पीड़ा देती है ?
  • सबसे ज्यादा पीड़ा पहुचाने  वाली बात है सीता जी कि अगिनी परीक्षा .भले ही वो भगवन राम की  लीला हो लेकिन उसने स्त्रियों की  समाज में स्थिति बहुत ख़राब कर दी .
  • भिखारी ठाकुर से आप कैसे जुडी ?
  • भोजपुरी से जुड़ने के कारण  भिखारी ठाकुर के बारे में काफी कुछ पता चला फिर मैंने उनके बारे में जाना उनके विचारो व् लेखन से भी बहुत प्रभावित हुयी तभी मैंने फैसला कर लिया कि इस गुमनाम हस्ती के लिए मै काम  अवश्य करुँगी . 
  • कोई सन्देश महिलाओ के लिए ?
  • संघर्ष हर जगह है चाहे वो घर हो या बाहर  .अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है .जिसके लिए आत्मविश्वास अत्यंत आवश्यक है .
अपने पति परवेज खान के साथ 






 "   द वेक " पत्रिका के साथ