'THE WAKE' HINDI MONTHLY MAGAZINE CAME IN ITS EXISTENCE ON 12th NOVEMBER 2005 . SINCE THEN IT'S IN CONTINUATION . "SELECTED INTERVIEWS OF THE WAKE"
शनिवार, 2 मई 2020
"THE WAKE" : R.K. HANDA.
"THE WAKE" : R.K. HANDA.: आर के हांडा , डायरेक्टर जनरल ऑफ पोलिस सिक्किम (अवकाश प्राप्त ) भाजपा प्रत्याशी ,बैरकपुर R.K. HANDA ,EX DGP , दार्जिलिंग में प्रभाव...
शुक्रवार, 1 मई 2020
"THE WAKE" : प्रोफेसर, समाजसेवी, कवि प्रभामई सामंत राय
"THE WAKE" : प्रोफेसर, समाजसेवी, कवि प्रभामई सामंत राय: प्रश्न, उड़ीसा से वियतनाम का सफ़र और नौकरी कैसे संभव हुआ? उत्तर, मै वियतनाम, भारतीय सरकार की तरफ से नहीं गई थी बल्कि मेर...
"THE WAKE" : प्रख्यात चित्रकार वसीम कपूर
"THE WAKE" : प्रख्यात चित्रकार वसीम कपूर: कलाकार वसीम कपूर जिस तरह से बेजान तस्वीरो में प्राण फूँकते है, अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से समाज के ज्वलंत विषयों को बखूबी उठाते...
"THE WAKE" : डाक्टर कुंवर बेचैन , प्रतिष्ठित ,लोकप्रिय कवि
"THE WAKE" : डाक्टर कुंवर बेचैन , प्रतिष्ठित ,लोकप्रिय कवि: ३१. ८. २०१८ प्रश्न, आप अभी अभी मॉरीशस में तीन दिनों के लिए ११ वे विश्व हिंदी सम्मलेन का हिस्सा बने ,क्या आप बता सकते है की इस तरह ...
डाक्टर कुंवर बेचैन , प्रतिष्ठित ,लोकप्रिय कवि
३१. ८. २०१८
प्रश्न, आप अभी अभी मॉरीशस में तीन दिनों के लिए ११ वे विश्व हिंदी सम्मलेन का हिस्सा बने ,क्या आप बता सकते है की इस तरह के आयोजन हिंदी के प्रचार -प्रसार में कितने सार्थक होते है ?
उत्तर, इस तरह के आयोजन हिंदी के प्रचार -प्रसार में हमेशा ही सार्थक होते है , क्योंकि देश -विदेश से अनेक लोग इस तरह के सम्मलेन में भाग लेने आते है वे अपने देश में जाकर हिंदी का प्रचार करते है जो की हमारे देश के लिए सम्मान की बात है। दूसरी अहम बात की किसी दूसरे देश में इस तरह का आयोजन जब किया जाता है तो वहां महीनों से तैयारी चलती है जिस दिन से ये तैयारी आरम्भ होती है उसी दिन से हिंदी का प्रचार -प्रसार आरम्भ हो जाता है। हम लोग भी जब उस देश में पहुंचते है तो हिंदी की धूम देखकर हम सबका मन खुश हो जाता है।
प्रश्न ,आप अब तक कितनी बार मॉरीशस गए है और तब से अब तक क्या परिवर्तन आये है ?
उत्तर ,मॉरीशस मै अनेक बार गया हूँ लेकिन सबसे पहली बार १९८४ में गया था एक चार्टर प्लेन भर कर लोग भारत से गए थे। उसमे ,कवि ,लेखक, पत्रकार, राजनीतिज्ञ आदि थे ,सबने उस यात्रा का बहुत आनंद उठाया। प्लेन में ही कवि सम्मलेन हुआ मैंने भी वही बैठे -बैठे कविता लिखी और सबको सुनाई ," नीचे बादल ऊपर हम " दूसरे दिन ये पंक्तियाँ मॉरीशस के प्रत्येक अख़बार की मुख्य खबर बनी। बड़ा ही उल्लास पूर्ण आयोजन था। उस समय हम बीस दिन रहे थे तब होटल में ठहराने का चलन नहीं था। हम लोग वहां के स्थानीय भारतीय समुदाय के लोगो यहाँ ठहरे थे। इस तरह से हमने मॉरिशस को अंदर से समझा जिन घरों में मै रुका वे लोग शुद्ध हिंदी बोलते थे ये देखकर बड़ी सुखद अनुभूति हुयी। 2018 में होटल में ठहराया गया। बड़ा ही व्यस्त कार्यक्रम था ,कब तीन दिन गुजर गए पता ही नहीं चला। बाहर से आये लोगो को देखने सुनने और समझने का मौका मिला अनेक देशों के लोगो ने हिस्सा लिया था वे हिंदी में ही बात करते। हिंदी समुदाय के लोगो में मानसिक आदर्श देखने को मिला। वे वापस अपने देश जाकर हिंदी का ही प्रचार करेंगे। अतः अगर हिंदी को विश्व भाषा बनाना है तो इस तरह के आयोजन अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न , कुछ लोगो का कहना है कि वहां के प्रधानमंत्री ने अंग्रेजी में भाषण दिया जो की उचित नहीं था ?
उत्तर, जिन लोगो को जानकारी नहीं है वे ही इस तरह की बात करते है। मै अब तक २२ देशों के हिंदी कार्यक्रमों में जा चुका हूँ ,वहां के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री अपने देश की भाषा बोलते है। हमारे यहाँ भी जब कोई विदेश से आता है तो हम सब भी अपने ही देश की भाषा बोलते है। मॉरिशस की ऑफिशियल भाषा अंग्रेजी है और बोलचाल की भाषा क्रेयोल है। लगता है लोगो ने ध्यान नहीं दिया क्योकि जब प्रधानमंत्री आये तो उन्होंने सबसे पहले हिंदी में नमस्कार किया ,उसके बाद उन्होंने अपना वक्तव्य अंग्रेजी में दिया मगर बीच -बीच में अनेक वाक्य हिंदी में भी थे। हम सबको उनके इस प्रयास की सराहना करनी चाहिए। दूसरी बात की वो जो भी बोलते उसका अनुवाद संग -संग हिंदी में हो रहा था। भारत से जो नेता गए उन्होंने हिंदी में ही अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। ऐसी बातें सुनकर मुझे लगता है की लोगो को अपना दृष्टिकोण सकारात्मक रखना चाहिए क्योंकि एक सकारात्मक सोच ही आपको सफलता के पायदान पर ले जा सकती है।
प्रश्न , क्या हिंदी भाषा अपना स्वरूप बदल रही है , जैसे की हिंदी की जगह हिंगलिश का चलन बढ़ रहा है ?
उत्तर ,जिस भाषा का विकास होता है उसे ही बेहतर माना जाता है और किसी भी भाषा को विकास के लिए दूसरी भाषा के शब्दों अंगीकार करना ही पड़ता है। अंग्रेजी भाषा में भी बहुत से शब्द दूसरी भाषाओँ के है। अंग्रेजों ने जहाँ -जहाँ शासन किया उन्होंने वहा के शब्दों को अपनी भाषा में सम्मिलित किया इसी लिए उसका विकास भी हुआ । हिंदी में भी उर्दू के शब्द बहुत है। अगर ये कहा जाये की अब कोई शुद्ध हिंदी नहीं बोलता तो आजकल न शुद्ध हिंदी बोलने वाले मिलेंगे न सुनने वाले। जो शब्द आसानी से जुबान पर चढ़ जाये उसे ही बोला जाता है। लौह पथ गामिनी जैसे शब्द प्रचलित नहीं हो सकते। वैसे भी बोलचाल की भाषा अलग होती है और लिखने की अलग। बोलने में सारी भाषाओँ के शब्दों को समेट कर बोला जाता है .
प्रश्न, अन्य देशों की तुलना में मॉरिशस का उद्घाटन समारोह कैसा रहा ?
उत्तर, मॉरिशस उद्घाटन समारोह बहुत ही भव्य था किन्तु पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के निधन के कारण उसे शांति से मनाया गया. कविसम्मेलन को काव्यांजलि के नाम से सम्बोधित किया गया। सभी कवियों ने काव्य पाठ से पहले अटल जी को श्रद्धांजलि स्वरूप कविता की चार-छह पंक्तियाँ उनकी कर्मठता और जीवन को समर्पित की। शोर -गुल न करके सादगी की बानगी देते हुए कवियों ने अपनी गरिमा रखी। विदेशों की तुलना में एक ही अंतर कि इस बार अटल जी का निधन हो गया।
प्रश्न , इस सम्मेलन में आपको क्या नई बात देखने को मिली ?
उत्तर ,वहां छोटे -छोटे अनेक कक्ष बनाये गए थे जिनमे गोष्ठिया आयोजित की जाती, चूँकि लोग ज्यादा थे और सबके विषय भी अलग थे अतः किसी को पता ही नहीं चलता की कहाँ क्या हो रहा है। लेकिन समापन समारोह के समय समस्त कार्यक्रमों की रिपोर्ट पेश की गयी जिसमें प्रत्येक गोष्ठी से सम्बंधित विषय और उसमे भाग लेने वालों के नाम बताये गए यहां तक की निष्कर्ष क्या निकला उस पर भी चर्चा हुयी। तीन दिनों का निचोड़ पेश किया गया और आगे क्या करना है और उनपर क्या निर्णय लिए गए वो भी बताएं गए। बहुत सी ज्ञानवर्धक बातें सुनने को मिली जिन्हे सुनकर मन प्रफ्फुलित हो गया।
प्रश्न , आप अपने और अपने साहित्य के बारे में कुछ बतायें ?
उत्तर ,मै बहुत संघर्षों से निकला हूँ , मेरा नजरिया सकारात्मक है। मै कमियों पर ध्यान नहीं देता जब तक की वे जानबूझकर न की जाये। व्यवहारिकता मेरी पूंजी है। मेरा मानना है कि सोच का क्षितिज विस्तृत होना चाहिए। १६ वर्ष की आयु से मै मंचो पर जाने लगा था। मेरी अबतक ३५ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। २१ लोगो ने मेरे अंडर में पी एच् डी की है जबकि २२ लोग मेरी गजलों कविताओं पर पी एच् डी कर रहे है।
मंगलवार, 14 अप्रैल 2020
प्रख्यात चित्रकार वसीम कपूर
कलाकार वसीम कपूर जिस तरह से बेजान तस्वीरो में प्राण फूँकते है, अपनी पेंटिंग्स के माध्यम से समाज के ज्वलंत विषयों को बखूबी उठाते है ..... ये एक विलक्षण प्रतिभा का स्वामी ही कर सकता है
इस हुनर ने आपको देश में ही नहीं अपितु -विदेश में भी नाम सम्मान और पहचान दी है-
प्रश्न, आप पश्चिम बंगाल की सी एम ममता बनर्जी के बारे में क्या सोचते है ?
उत्तर, ममता जी तूफान बन कर आयी थी, उन्होंने बहुत संघर्ष से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की कुर्सी पाई थी, किन्तु आज वो वही गलतियां कर रही है जो किसी समय लेफ्ट पार्टी ने की थी। सीपीएम भी धीरे -धीरे जनता से दूर होती गयी, उसके कैडर अब कही दिखते नहीं । ममता जी भी जनता से दूर जा रही है।
प्रश्न, क्या ममता जी भाजपा को ला रही है ?
उत्तर , बिलकुल ला रही है ठीक वैसे ही जैसे सीपीएम टीएमसी को लायी थी। देखिये , वकीलों की जिस तरह से हावड़ा कोर्ट परिसर में पिटाई हुयी क्या वो सही था। जय श्री राम का नारा लगाने वालों को गिरफ्तार कर लिया जाये या उन्हें मारा - पीटा जाए क्या ये ठीक है। परिणाम जय श्रीराम का नारा बंगाल की राजनीती का टर्निंग प्वाइंट बना। एक बुजुर्ग मरीज को डाक्टर नहीं बचा पाया, २०० लोग गाड़ियों में भरकर आते है और डाक्टरों के साथ मार - पीट करते है जिसमे एक डाक्टर को इतना मारा जाता है की वो जिंदगी मौत की लड़ाई लड़ रहा है। इसके बाद डॉक्टर्स सुरक्षा को लेकर धरने पर बैठे तो ममता जी वहां पहुंच जाती है, समस्या सुलझाने की जगह उनको मेडिकल परिसर से निकाल देने की धमकी देती है। परिणाम ये हड़ताल बंगाल से निकल कर पूरे देश में पहुंच गयी और ममता जी के अड़ियल स्वभाव की चर्चा भी सर्वत्र होने लगी। सबसे बड़ी बात की जिस तरह से छोटी - छोटी बात पर ममता जी अपना आपा खो देती है ये उनकी छवि को ख़राब कर रहा है। उनकी तुनक मिजाजी और अदूरदर्शिता के एक नहीं अनेकों उदाहरण है।
प्रश्न, आप किस प्रकार की अदूरदर्शिता की बात कर रहे है?
उत्तर, डाक्टरों की मांग सिर्फ सुरक्षा को लेकर थी जिसे 2मिनट में सुलझाया जा सकता था लेकिन ममता जी अपने इगो के चलते उन्हें धमकाने पहुंच गई। उस समय उनकी जो बॉडी लैंग्वेज थीं वो मुख्यमंत्री की गरिमा के खिलाफ थी। उन्होंने डाक्टरों को निकाल देने की बात की मगर वो ये भूल गई की वो इतने डाक्टर कहां से लाएगी जो मरीजों का इलाज कर सके।
प्रश्न, ममता जी कहती है उनका भ्रष्टाचार से कोई नाता नहीं है आप का इस बारे में क्या कहना है ?
उत्तर, उनका कहना है कि उनका नारडा - शारदा से कोई लेना देना नहीं है मगर वो पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर उनके साथ मेट्रो के सामने 10 दिन तक पुलिस और पार्टी के नेताओं के साथ धरने पर बैठी रहती है।
प्रश्न, आप लेफ्ट से है, इसलिए मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी से इतनी शिकायत होना स्वाभाविक है?
उत्तर, मै किसी पार्टी का मेंबर नहीं हूं, रही बात शिकायत की तो हमें शिकायत इसी लिए है कि वो हमारी मुख्य मंत्री है उनसे बंगाल को बहुत सारी उम्मीदें है. उन्हें अपने को संयत रखने की आवश्यकता है लेकिन वे अपनी तुनक मिजाजी के चलते अपने लिए समस्याएं ज्यादा पैदा कर रही है बंगाल को कम देख रही है।
प्रश्न, आजकल लोगों को कहते हुए सुन रहे है की बंगाल अपनी संस्कृति खो रहा है ?
उत्तर, ये हमारे सम्मुख एक ज्वलंत विषय हैं जिसके बारे में सभी को सोचना होगा क्योंकि जिस तरह के हालात चल रहे है जैसे कि मूर्ति तोड़ना या दूसरे राजनीतिक दलों के साथ हिंसा, कतल आदि। उसे देखते हुए ये समझ लेना चाहिए कि बंगाल आज खतरनाक मोड़ पर खड़ा है अगर हम सभी नहीं चेते तो आने वाले दिनों में बंगाल अपनी पहचान ( सांस्कृतिक, साहित्यिक, रविन्द्र संगीत) खो देगा।
प्रश्न, कला की दृष्टि से आप ममता जी को कहां पाते है?
उत्तर, उन्होंने पेंटिंग बनाने का प्रशिक्षण नहीं लिया जो भी बनाया अपनी खुशी के लिए बनाया। उसमे कभी कुछ अच्छा बना तो कभी कुछ कम अच्छा बना। उनकी पेंटिंग तुलना की नजर से नहीं वरन पेंटिंग के प्रति उनके जुनून को देखना चाहिए।
प्रश्न, बच्चियों के प्रति बढ़ते हुए बलात्कार के बारे में आपकी राय?
उत्तर, सख्त कानून की कमी। डी एन ए टेस्ट के बाद अगर अभियुक्त अपराधी सिद्ध हो जाता है तो उसे संग संग गोली मार देनी चाहिए। फास्ट ट्रेक कोर्ट होना चाहिए। मोदी जी को इस विषय में गंभीरता से सोचना होगा अन्यथा उनका स्लोगन " बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से फिर रेप करवाओ बन जाएगा।
प्रश्न, आप अपनी पेंटिंग्स के लिए मशहूर है, अनेक जाने - माने लोगो की पेंटिंग्स बना चुके है कृप्या उनके नाम बताइए?
उत्तर, कपिल देव की पेंटिंग पेप्सी वालों ने बनवाई थी सौरभ गांगुली की पेंटिंग हर्ष नेवटिया ने, सौमित्र चटर्जी की पेंटिंग सहारा इंडिया ने। काफी लंबी सूची है हाल - फिलहाल मैंने ईशा अंबानी और उनके पति आनंद पीरामल की पेंटिंग बनाई है। मेरे द्वारा हीरेन मुखर्जी की बनाई हुई पेंटिंग संसद में लगी हुई है। खान अब्दुल गफ्फार की पेंटिंग विक्टोरिया मेमोरियल में , पर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय ज्योति बसु की पेंटिंग विधानसभा में लगी हुई है।
प्रश्न, कभी पेंटिंग ने आपकी मुश्किल बढ़ाई ?
उत्तर, मेरी बुर्के वाली पेंटिंग बहुत ही विवादास्पद रही। करीब 200 लोगो की भीड़ ने मेरे घर का घेराव कर लिया था कि मै बुर्के के खिलाफ हूं जिसे मेरे पिताजी बहुत सलीके से समझाया कि मै बुर्के के खिलाफ नहीं अपितु बुर्का पहन कर फोटो खिचानें के खिलाफ हूं।
प्रश्न, अब तक का सबसे बड़ा सम्मान जो आपको दिया गया हो ?
उत्तर, सम्मान तो बहुत से मिले लेकिन अभी कुछेक महीने पहले रविन्द्र भारती युनिवर्सिटी में पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा एवार्ड "एकेडमी अवार्ड " मिला।
गुरुवार, 9 अप्रैल 2020
प्रोफेसर, समाजसेवी, कवि प्रभामई सामंत राय
उत्तर, मै वियतनाम, भारतीय सरकार की तरफ से नहीं गई थी बल्कि मेरी सीधे नियुक्ति हुई थी। मेरा विस्तृत साक्षात्कार कई घंटों में लिया गया। हां इसमें गीतेश जी की इंडो - वियतनाम सौलिदेरिती कमिटी का बड़ा योगदान है।
प्रश्न, वियतनाम की तरफ झुकाव कैसे पैदा हुआ?
उत्तर, मैंने वियतनाम का इतिहास पढ़ा वहां की महिलाओं का लिब्रेशन वार में योगदान के बारे में जाना और जाना हो ची मिन्ह के संघर्ष, त्याग के बारे में, बस तभी से मेरे मन में वियतनाम जाकर रहने और कुछ करने की इच्छा पनपने लगी।
प्रश्न, शुरुआती दौर का कोई संस्मरण जिसने वियतनामी लोगो को समझने में मदद की।
उत्तर, मै जब वहां पहुंची तो मेरे सामने सबसे बड़ी समस्या वियतनामी भाषा समझने की थी। मुझे खाद्य - पदार्थो के न नाम मालूम न दाम। तब मैंने अपने फ्लैट के पास ही रहने वाली एक वियतनामी छात्रा से इंग्लिश में लिख कर पूछा कि अगर वो रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं के नाम और दामों के वियतनामी नाम अंग्रेजी में लिख कर दे दे तो मुझे उन्हें खरीदने में सुविधा हो जाएगी। ये कहकर मै अपने कमरे में आकर सो गई। आधा घंटा भी नहीं हुआ कि एक स्लिप जिसमें लगभग 60 - 70 वियतनामी जरूरत की वस्तुओं के नाम अंग्रेजी में लिखे हुए दरवाजे के नीचे से अंदर आ गई। तब मुझे महसूस हुआ कि ये लोग मददगार होते है।
प्रश्न, वैसे वियतनामियों का स्वभाव कैसा होता है?
उत्तर, सीधे, स्पष्टवादी, समय के पाबंद। मिलना - जुलना पार्टी करना बहुत पसंद है। सफाई पसंद भी बहुत होते है।
प्रश्न, पार्टी मतलब कैसी पार्टी?
उत्तर, ये लोग प्रत्येक शुक्रवार को आफिस बंद होने के बाद पार्टी करते है। होटल, रेस्टोरेंट पार्क और तो और फुटपाथ को भी वे लोग पार्टी के लिए इस्तेमाल करते है। वहां के फुटपाथ भी काफी चौड़े होते है।सबसे अच्छी बात की रात को दो - ढाई बजे तक चलने वाली पार्टी का कोई भी कचरा दूसरे दिन सुबह फुटपाथ , सड़क या पार्क में नहीं मिलेगा। वे लोग इस मामले में बहुत ही अनुशासन और सफाई प्रिय है। दूसरी बात कि उनकी पार्टियां शुक्र और शनिवार ही होती है रविवार वे लोग आराम और दूसरे दिन आफिस जाने की तैयारी करते है।
प्रश्न, उनका भोजन कैसा होता है?
उत्तर, वे लोग स्वास्थ्य के प्रति बड़े सचेत रहते है। अधिकतर उनके खाने में उबली सब्जियां, सलाद, फल आदि शामिल रहते है। वे लोग स्वयं को स्लिम - ट्रिम रखने के लिए तरह - तरह की पत्तियां खाते है। अगर तली - भुनी मछली खायेगे तो उसे भी पत्ते में रखकर खाएंगे क्योंकि उनका मानना है कि पत्ते तेल की मात्रा पेट कम करेगे।
प्रश्न, वहां अपराध की क्या स्थिति है?
उत्तर, वहां शादी सब अपनी मर्जी से करते है, वहां बच्चे अवैध नहीं होते और अपराधिक मानसिकता भी नहीं होती। मेरी एक मित्र को नाचने का बहुत शौक था वो रात के बारह बजे क्लब में जाती क्योंकि बारह बजे के बाद प्रवेश शुल्क नहीं लगता। वहां जाकर वो पागलों की तरह दो - तीन घंटे नाचती और मै नींबू पानी या कोल्ड ड्रिंक लेकर बैठी रहती। रात के तीन बजे अत्यंत तंग कपड़ों में वो मुझे स्कूटी चलाकर क्लब से 10 किलोमीटर दूर मेरे घर छोड़ने आती तत्पश्चात लगभग छह किलोमीटर दूर अपने घर जाती
मै उससे पूछती की सुरक्षित हूं तो? तो इसपर वो हंसती और कहती चिंता मत करो।
प्रश्न, स्वस्थ रहने के लिए वो और क्या करते है?
उत्तर, वो लोग सोना बाथ लेते है इससे उनकी त्वचा चमकदार और स्वस्थ रहती है।
प्रश्न, तुम वहां नियमित सोना बाथ ( भाप स्नान ) करती थी?
उत्तर, नहीं मुझे बहुत शर्म लगती थी क्योंकि वियतनामी महिलाएं चुस्त - दुरुस्त छरहरे बदन वाली होती है और वो सोना बाथ ( भाप स्नान) करने जब जाती है तो सारे कपड़े खोल कर जाती है , मै दोहरे शरीर की जिसे वहां के लोग मोटा समझते है इसलिए मै हिम्मत ही नहीं कर सकी। मैंने अपनी एक दोस्त के घर में सोना बाथ लिया है। उसको लेने के बाद लगेगा की 10 - 12 किलो वजन कम हो गया।
प्रश्न, वियतनाम की और क्या विशेषता है जिसने तुम्हे बहुत प्रभावित किया हो?
उत्तर, वियतनाम में भिखारी नहीं मिलेंगे, 70 - 80 वर्षीय बुजुर्ग भी अपने आत्म सम्मान को बनाए रखने के लिए खिलौने या छोटा मोटा सामान सड़क के किनारे बैठ कर बेंचते है।
प्रश्न, वहां के लोगों में राष्ट्रीय भावना कैसी है ?
उत्तर, वहां महीने में एक या दो बार स्कूली बच्चों को फौजियों से मिलवाया जाता है ताकि वे उनके कार्य, मेहनत व राष्ट्र के प्रति वफादारी को समझ सके। परिणाम बच्चों में बचपन से राष्ट्रीयता कूट कूट कर भरा जाती है।
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