बुधवार, 5 दिसंबर 2012

FARZANA AALAM , DEPUTY MAYOR ,KOLKATA

 जिंदादिल  ,खुशमिजाज ,लोकप्रिय, कर्मठ 
 उपमेयर, फरजाना आलम 
प्रश्न: आप अपने सफल जीवन यात्रा के बारे में बताये ?
उत्तर: मेरे पिताजी जमींदार परिवार से थे हम लोगो की बिहारशरीफ में बहुत बड़ी हवेली है । वो जमींदार थे इसलिए उनका लोगो से मिलना कम ही होता था जबकि मेरे पिताजी को समाज सेवा बहुत पसंद थी ।यही नहीं मेरे पिताजी ने वकालत पास की और उन्होंने पढाई का महत्त्व समझा इसलिए हम सभी भाई -बहन  ने अपनी रूचि के अनुसार शिक्षा ग्रहण की । हमने बीएड  और   पालसाईंस में ऍम .ऐ किया ,वकालत पास की ।चूँकि पिताजी राजनीति में थे इसलिए बचपन से ही राजनीतिक माहौल घर में था । उनके चुनाव के समय हम लोग औटो में बैठकर प्रचार करते ,वोट मांगने जाते .मीटिंग में भाषण देते ।भाषण देना हमें बहुत अच्छा लगता था ।
प्रश्न: आप जिस समुदाय से आई है ,उसमे इतना खुलापन कम ही देखने को मिलता है । क्या आपको भी कभी खिलाफत झेलनी पड़ी ?
उत्तर:देखिये किसी भी महिला को आगे दो ही व्यक्ति बढ़ाते है , पिता या पति ? मै खुशनसीब हूँ की मुझे दोनों का ही सहयोग मिला । हमारे पिताजी ने हमें छूट दी । इसका कुछ लोगोने विरोध भी किया की कैसे लड़की होकर ऑटो में बैठकर प्रचार कर रही है या मीटिंग्स में  जा रही है लेकिन पिताजी ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया । मेरे पति जो पेशे से वकील है ,शादी के बाद वो हमें खुद लेकर मीटिंग में जाया करते थे इस लिए लोगो को ज्यादा बोंलने का मौका नहीं मिल सका । लेकिन ये सच है की एक महिला वो भी मुस्लिम , के लिए अपनी दम पर इतना आगे जाना नामुमकिन है ।
प्रश्न:आपका बंगाल में आना कैसे हुआ ?
उत्तर : मेरी माँ बीरभूम की रहने वाली थी । हम लोग साल में एक बार नानी के घर आते । मेरी माँ की आन्तरिक इच्छा थी की मेरी शादी बंगाल में हो वर्ना बंगाल से रिश्ता ही ख़त्म हो जायेगा क्योकि मेरे बाकि के भाई -बहन बिहार में है ।किस्मत से मेरे पति का घर बोलपुर (बंगाल) में है । इस तरह से 1996 में  शादी करके हम बंगाल में आ गए ।
प्रश्न: चुनाव का अनुभव आपका कैसा रहा ?
उत्तर : मैंने पहला चुनाव 2000 में राजाबाजार 29 नम्बर वार्ड से लड़ा था जबरदस्ती ढाई हजार वोट से हराया । 2005 में फिर चुनाव लडा फिर हारे  लेकिन इस बार अपनी हार पर भरोसा ही नहीं हो रहा था की हम हारे है। क्योंकि हमने  मेहनत बहुत की थी और हमें जबरदस्ती हराया गया था ।चूँकि संघर्ष करना हमने बचपन से सीखा था अपने पिता को देखकर  बाद में ममता दीदी को संघर्ष करते देखा इसलिए हिम्मत नहीं टूटी ।
प्रश्न : आपने इतना काम किया ,क्या आपकी कर्मठता को पहचानते  हुए आपको कोई सम्मान मिला ?
उत्तर, हमने कोई काम पुरस्कार या सम्मान पाने के लिए नहीं किया न कभी इस दिशा में सोचा लेकिन  हाल ही में मुझे दो बड़े  सम्मानों से सम्मानित किया गया है ये मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है । 2010 में मदर टेरेसा इंटर नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया ।2011 में माइकल मधुसूदन  इंटर नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया ।
प्रश्न: आप माँ है ,क्या आपका बच्चा आपके कार्य से संतुष्ट है? 
उत्तर : मेरा बेटा नौ वर्ष का है वो जनता है की उसकी माँ को बहुत कार्य करना पड़ता है लेकिन बच्चा होने के नाते वो अक्सर रोता है ।उसे लगता है की  दूसरे बच्चों की माओं की तरह उसकी माँ भी उसे स्कूल लेने आये या घुमाने ले जाये ।
प्रश्न: आपको   अपने बच्चे को समय न देने के कारण  ग्लानी तो बहुत होती होगी ।
उत्तर: मेरा बच्चा बड़े अरमान वाला है क्योकिं वो शादी के सात सालो के बाद पैदा हुआ ।  जब वो नौ महीने का था तभी हमें वर्धमान एक सम्मलेन में शामिल होने के लिए जाना पड़ा । हमने अपने बेटे को  अपनी ननद  के पास छोड दिया और सम्मलेन में  चले गए। वही  से  कुछ लोग हमें जबरदस्ती दूसरी मीटिंग्स में ले  गए । उस दिन पता नहीं क्यों मेरा बेटा बहुत रोया । ये देखकर मेरी ननद की सास गुस्से से लाल हो गयी और दरवाजे पर ही मेरा इंतजार करने लगी ।हम जब घर पहुंचे   उस समय  रात का नौ बज रहा था | मुझे देखते ही बोली " सुना है तुम्हारा बेटा बड़े अरमान वाला है ( मन्नत ) और तुम  उस बच्चें की माँ हो जिसे उसकी क़द्र ही नहीं।   पूरा दिन उसे छोड़कर घूम रही हो पता है की आज वो कितना रोया है।"  ऐसे एक दो नहीं वरन अनेक किस्से है ।
प्रश्न : तब तो आप जब घर पर  रह ती होगी तो उसके लिए किसी त्यौहार से कम नहीं होता होगा ?
 उत्तर : बिलकुल वो मेरे पास ही घूमता रहता है ।बार-बार पूछेगा मम्मी क्या चाहिए । उसे चिकिन बिरयानी और पुलाव बहुत पसंद है मेरी कोशिश होती है की मै उसे उस दिन उसकी पसंद का खाना बना कर  खिलाऊ ।
प्रश्न: आप ने बीएड़ किया है ,वकालत भी पास की । फिर भी आप राजनीति में ही क्यों आयी ?
उत्तर : मै चाहती तो टीचर या वकील बन सकती थी लेकिन राजनीति का क्षेत्र समाज सेवा के लिए सबसे बड़ा और बेहतर क्षेत्र है मै बचपन से ही   समाजसेवा करना चाहती थी ( स्वयम सेवा नहीं ,जैसा की आज के अधिकतर नेता कर रहे है )  इसलिए मैंने इस क्षेत्र को चुना । मै लोगो को भी यही सन्देश देना चाहती हूँ की पहले देश सेवा करना आवश्यक है जब देश बनेगा तभी आपकी तरक्की होगी ।





मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

Dr. Sarla Birla & business tycoon Mr. B.K.Birla / Ideal & inspiring couple.

 आशा और उत्साह का संगम है जिंदगी गर सोच सही है. 
हर राह पर मिलता है मुकाम गर राह नही   है.
शत -शत स्वर्ण उषाओं से अभिषिक्त किये जाने के अधिकारी 
'द वेक' पत्रिका के साक्षात्कार
 के दौरान लिया गया चित्र 
प्रश्न १,  सुना है आप लोगो को घुमने का बहुत शौक है और आप ने केदारनाथ एवं बद्रीनाथ की यात्रा अनेक बार की ?
* हाँ ये सही है की हम लोग घुमने के शौक़ीन है विशेष कर तीर्थयात्राओ के . हम लोगो ने सत्रह बार केदारनाथ की यात्रा की ,जबकि दस बार बद्रीनाथ  गए  ,और दो बार अमरनाथ की दुर्गम यात्रा  तय की .
प्रश्न 2, ऐसी क्या वजह थी की आप सत्रह बार केदारनाथ गए ?
* प्रकति की अनुपम छटा हमें खीच कर वहा बार -बार ले गयी .वहा की सुन्दरता है ही ऐसी जिसे  देखकर मन भरता ही नहीं .
प्रश्न 3. आपकी दिनचर्या क्या है? 
* कुछ खास नहीं, हम लोग प्रातः चार बजे उठ जाते है. दैनिक क्रिया से निवृत होने के बाद  हम दोनों लोग साथ में भगवान का भजन करते है . 



आदर्श एवं प्रेरणाप्रद जोड़ी.
प्रश्न  4. आप दोनों लोग साथ में भगवान की पूजा करते है?
 * बाबू (बी.के.बिरला जी ) हारमोनियम बजाते है और हम  प्रार्थना  गाते है .उसके बाद सुबह की सैर यही बगीचे में करते है.  नाश्ता करने के बाद बिरला जी आफिस चले जाते है ,हम लोगो से मिलते है.किताबे पढ़ा करते है.हमें फ्रेंच सिखाने वाली टीचर आ जाती है उससे एक घंटे फ्रेच सीखते है. दो बजे तक ये वापस आ जाते है दिन का खाना  खाने के  पाश्चात्य थोड़े  बहुत इधर -उधर के  काम निपटाए लोगो से मिले .रात का खाना सात बजे तक खा लेते है और आठ बजने तक हम लोग सो जाते है.


     ध्यान पूर्वक बातो को सुनते हुए .
प्रश्न 5 . आपको फोटोग्राफी का बहुत शौक  रहा है,आपका ये शौक विरासत में किसे मिला है?
* मेरा पपौत्र ( कुमार मंगलम के बेटे )आर्यन विक्रम फोटो बहुत अच्छी खीचता है.वो क्रिकेट खेलने का   भी बहुत शौक़ीन है. 
जिंदगी जिन्दादिली का नाम है. 

प्रश्न ,6 आप फ्रेंच सीख रही है , ये तो बहुत बड़ी बात है वो भी इस उम्र में ?
*  अगर  दिमाग को व्यस्त नही रखा जाये तो ये अपना कार्य उतनी तेजी  से नहीं करता जिस तेजी से करना चाहिए, यानि की शिथिल होने लगता है. इसे तेज रखने के लिए ही हम फ्रेंच सीख रहे है.वैसे भी मेरा मानना है कुछ न कुछ नया करते रहना चाहिए .ये शरीर और दिमाग को हमेशा तरो- ताज़ा रखता है.
प्रश्न  7  , टीवी का आपके जीवन में क्या महत्त्व है?
*सिर्फ खबर देखते है.वो भी एक निश्चित समय पर .
प्रश्न  8 ,  आपको पुस्तके पढने का बहुत शौक है.
*हाँ हमें पुस्तके पढना बहुत अच्छा लगता है.मराठी ,हिंदी अंग्रेजी की अधिकतर पुस्तके हमने पढ़ी है.मुंशी प्रेमचंद का गोदान हमें बहुत पसंद है.
प्रश्न  9. आजकल लडकिया अपनीशिक्षा के साथ -साथ अपने अधिकारों के प्रति भी जागरूक है.जिसके लिए तलाक भी ज्यादा हो रहे है.अधिकतर लोग इसके लिए लड़कियों की शिक्षा को दोष देते है उनके अनुसार लड़कियों में सामंजस्य की कमी है.आप इस बारे में क्या सोचती है?
 * मेरे अनुसार  हमारा पहला कर्तव्य  परिवार के  प्रति है,हमें उसे ठीक रखने के लिए ज्यादा समय और ध्यान देना चाहिए.ये अच्छी बात है की आजकल लड़कियां शिक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रही है और शिक्षा ही उन्हें आगे बढ़ने में मदद देगी . 


'द वेक' पत्रिका के साथ
डॉ. सरला बिरला एवं उद्योगपति श्रीमान बसंत कुमार   बिरला .
       'द वेक' पत्रिका की संपादक शकुन त्रिवेदी एवं
समाचार संपादक राजेश मिश्र  के साथ  बिरला दम्पती .

मंगलवार, 27 मार्च 2012

Babu lal Marandi , (born 11 January 1958) was the first Chief Minister of Jharkhand.


बाबूलाल मरांडी भूतपूर्व मुख्यमंत्री (झारखण्ड) 



प्रश्न १ : आप झारखण्ड के पहले मुख्यमंत्री है ,इसके लिए आप सबसे ज्यादा किसके आभारी है.
* कोई भी इन्सान जब जमीनी स्तर से उठकर ऊंचाई पर  पहुँचता है तो सबसे पहले वो उनलोगों का आभारी होता है जिन्होंने उसे इस लक्ष्य तक पहुचने में मदद की मैंने भी अपने सभी सहयोगियों का आभार दिल से व्यक्त किया किन्तु जिसका मै सबसे ज्यादा आभारी हूँ वो उस   स्कूल के क्लर्क का जंहा कभी मै खुद शिक्षक था .
प्रश्न २:ऐसी क्या बात है जिसके लिए आप उस क्लर्क के अत्यधिक आभारी है ?
*जब मै शिक्षक था तो उस कलर्क ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया था जिससे व्यथित होकर मैंने उस स्कूल की नौकरी छोड़ दी.किन्तु जब मै मुख्यमंत्री बना तब मैंने महसूस किया की आज मै जो भी कुछ हूँ उसकी वजह वो क्लर्क है .तब मैंने निश्चय किया की मुझे उस क्लर्क का आभार व्यक्त करने जाना चाहिए और मैंने ऐसा किया भी.
प्रश्न ३: आप बहुत कम समय (२८ महीने)  के लिए मुख्यमंत्री के पद पर आसीन  रहे ,इस दौरान आपने जनता के लिए  कौन -कौन से  कार्य किये जिससे आपको संतोष और सराहना दोनों ही मिली ?
* मैंने सबसे पहले आदिवासी लड़कियों के लिए छात्रावास बनवाया जिसमे सौ से  अधिक छात्राए रह सकती है.उनके समुचित खान-पान की सही व्यवस्था की क्योकि आदिवासी कन्यायें इन सुविधाओ से वंचित थी.स्कूल का आवागमन सुविधायुक्त बनाने के लिए आदिवासी लड़कियों को साईकिल दिलाई .गरीबी रेखा से नीचे के तबके को यथासंभव मदद मुहैया करायी.योग्य छात्रो को बहार भेज कर पायलट की शिक्षा दिलवाने की व्यवस्था की.
प्रश्न ४: सबसे ज्यादा किस कार्य ने आपको परेशान किया ?
* मफियायो की उपस्थिति ने .गाँव के बाजारों पर माफियाओ का अधिकार था उनके चंगुल से बाजार को मुक्त करवाने में थोड़ी परेशानी अवश्य आई किन्तु धीरे -धीरे सब ठीक हो गया .और बाजार माफिया मुक्त हो गए .जिसका परिणाम लोगो की आमदनी में बढ़ोतरी हुयी. लोगो के आवागमन को सुचारू रूप से चलने के लिए बसों की गिनती बढाई ,बसों  के लिए सब्सिडी दी गयी .ऐसे अनेक कार्यो की लम्बी सूची है जिन्हें पूरा करने के लिए आज भी समर्पित हूँ .
प्रश्न ५ : ऐसी कौनसी बात है जिससे आपको क्षोभ होता है ?
* नक्सलियों की बढती संख्या को देखकर.जिसके लिए अनेक राजनितिक पार्टिया जिम्मेदार है.जो सत्ता में रहने के लिए इनकी आतंकित करने वाली गतिविधियों को अंजाम दिलवाते है.अपने स्वार्थ के लिए ये देश को खोखला कर रहे है. और इन्हें नजर भी नहीं आ रहा की वे देश के साथ धोखा कर रहे है.
प्रश्न ६: आपके प्रिय शौक क्या है?
*मुझे खुद भी नहीं मालूम की मेरे प्रिय शौक क्या है .किन्तु एकांत प्रिय है,और एकांत में संगीत सुनना अच्छा लगता है.जीवन के प्रत्येक अच्छे -बुरे समय को विधाता का आशीर्वाद समझ कर ग्रहण करता हूँ .
प्रश्न ७: आप युवाओं के लिए क्या सन्देश देना चाहते है?
* आज का युवा अपनी इच्छाओं को पूरा करने के चक्कर में बहुत जल्दी हतोत्साहित हो जाता है ,जो की गलत है.क्योकि इससे उसकी शक्ति घटती है. उसे अपने लक्ष्य को सामने रख कर कार्य करना चाहिए ,देर -सबेर हो सकती है.किन्तु लक्ष्य तक अवश्य पहुचेंगा. 

ये साक्षात्कार २००६ अप्रैल में 'डी वेक' हिंदी मासिक पत्रिका के लिए लिया गया था .
Babu Lal Marandi (born 11 January 1958) was the first Chief Minister of jharkhand  He is the founder and national president of jharkhand vikas Morcha. (Prajatantrik). He is the Member of Parliament from Koderma Lok Sabha constituency. He was the Minister of State, Forests & Environment, Govt. of India in the Atal Bihari Vajpayee government.

Early life :

Babulal was born in a remote Kodia Bank village under Tisri block of Giridih district of the now Jharkhand province.
After passing high school, he moved to Giridih College from where he did his intermediate and graduation. It was there that he came in contact with theRashtriya Swayamsevak Sangh.  
He worked as a teacher in a village primary school for a year before giving up the job to work for the Sangh Parivar. He served as the organising secretary of the Jharkhand region of Vishwa Hindu Parishad. 
In 1983, he moved to Dumka and worked in the Santhal Parganas division, which he toured extensively. In those days, he used to live in the RSS office in Dumka.

Political career:

In 1991, the BJP gave him the ticket to contest from the Dumka (reserved) Lok Sabha seat, but he lost. In 1996, he lost to Shibu Soren  by just 5,000 odd votes. The BJP, in the meantime, made him president of the party's Jharkhand unit.
It was under Marandi's leadership that the party won 12 out of 14 Lok Sabha seats in Jharkhand region in the  1998  election. Marandi, a Santhal, led the tally by defeating Jharkhand Mukti Morcha supremo Shibu Soren, another Santhal.

रविवार, 18 सितंबर 2011

शहरयार कबीर

 १. आपने अब तक  70 से ऊपर किताबे लिखी है,उनमें से कौन सी पुस्तक ज्यादा पसंद की गयी ? 
*मै अबतक अस्सी से ऊपर किताबे लिख चुका हूँ, जिनमे से पांच किताबो को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर काफी पसंद किया गया.
२. आपके लेखन ने हमेशा गलत नीतियों व् कट्टरपंथियों का विरोध किया है, जिसके कारण आप विवादित भी रहे और आपको इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी?
*ये सही है की मैंने इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई है,कितनी बार मेरे ऊपर जानलेवा हमला हुआ .दो बार जेल भी गया. आज मै जिस छड़ी के सहारे चल रहा हूँ ये उसी की दें है.
३.आपने कभी हिम्मत नहीं हारी क्यों?
*हिम्मत हारने का सवाल ही नहीं उठता. क्योकिं मै जो भी कर रहा हूँ अपने देश के लिए कर रहा हूँ ,जनता के अधिकारों के लिए कर रहा हूँ. 
४. आपकों कभी कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश से निकालने की चेष्टा नहीं की?
*वे ऐसा नहीं कर सकते थे क्योकिं उनपर अंतराष्ट्रीय  दबाव था.
५.बांग्लादेश के कट्टरपंथियों ने अब तक २८ पत्रकार और एक साहित्यकार कों मौत के घाट उतार दिया एवं अनगिनत पत्रकारों को यंत्रनाये दी गयी ,जिन लोगो ने उनकी नीतियों का विरोध किया ऐसी स्थिति में क्या उम्मीद की जाये की आने वाले दिनों में कट्टरपंथियों की ही हुकूमत चलेगी. 
*बांग्लादेश की जनता ने उन कट्टरपंथियों को चुनाव में हराकर जवाब दे दिया की उनके साथ नहीं है.वहां के लोगो ने आवामी लीग के पक्ष में वोट दिया जिसका परिणाम शेख हसीना आज बांग्लादेश की प्रधानमंत्री है.
६.आप पत्रकारिता से जुड़े हुए है,मानवाधिकार के लिए कार्य करते है.कट्टरपंथियों के खिलाफ लड़ाई लड़ते है, क्या भविष्य में आप चुनाव लड़ना चाहते है?
*मै चुनाव लड़ कर पार्टी के कामों के लिए बंधना नहीं चाहता. मेरा उद्देश्य  समाजसेवा है पार्टी सेवा नहीं .
७.क्या कट्टरपंथी विश्व के लिए खतरा है ?
*बिलकुल खतरा है. इसीलिए हमलोग चाहते है की ऐसे लोगों को पनपने न दिया जाएँ जो मानवता का उन्मूलन करना चाहते है?
८.भारत के बारे में बांग्लादेश के लोगों की राय बहुत अच्छी नहीं है क्यों?
*भारत में जब बाबरी मस्जिद ध्वस्त की गयी थी तो बांग्लादेश में ३५०० मंदिर तोंडे गए.पाकिस्तान में भी १०० से ज्यादा मंदिरों को नष्ट कर दिया गया. इस तरह की घटनाएँ जब कही भी जन्म लेती है तो पडोसी देशो में इनकी प्रित्क्रिया अवश्य होती है जो दूरी और द्वेष कों जन्म देती है.
९.तसलीमा नसरीन के बारे में आपकी क्या राय है ?
*वो एक साहसी लेखिका है .उसे अपनी भावनाओं कों व्यक्त करने का पूरा अधिकार है. मैंने उनका साक्षात्कार भी अपनी पत्रिका के लिए लिया था हालाँकि उनके और हमारे विचारों में बहुत भिन्नता है .
१०. आपने स्वतन्त्र पत्रकारिता की थी या किसी समूह से जुड़कर ?
*मैंने १९७२ से लेकर १९9२ तक विचित्र नामक पत्रिका के लिए लिखना आरंभ किया था. बाद में मै इसका प्रधान संपादक बन गया था. यही नहीं मै  बहुत से दैनिक अख़बारों के लिए भी नियमित स्तम्भ लिखता था साथ ही विवादों के घेरे में भी रहता था.
११.आप documentary  फिल्म बनाते है? 
*मैंने 'WAR CRIMES 71' बनायीं थी जिसका premier  लन्दन में १६ अक्तूबर को  हुआ था.अभी भी मै एक documentary  पर काम कर रहा हूँ जिसके सिलसिले में आजकल  भारत आना हो रहा है .
१२. भारत के बारे में आपका क्या ख्याल है ?
* भारत दुनियां का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है, उसे धर्मनिरपेक्षता के क्षेत्र में अभी और काम करने की आवश्यकता है .

शनिवार, 17 सितंबर 2011

SHAHRIAR KABIR

Shahriar Kabir 

 a Bangladesh Awamileague Supported  BANGLADESH journalist, filmmaker,  HUMAN RIGHTS activist, and author of more than 70 books focusing on human rights, communalism, fundamentalism, history, and the Bangladesh war of independence.
Mr. Kabir after completing his schooling in 1968 with Higher Secondary Certificate in 1968 and formal education in 1971 Mr. Kabir began his journalist career. As a freedom fighter he participated in our liberation-war against the Pakistani occupation force in 1971. After liberation of Bangladesh from Pakistani occupation force Shahriar joined ‘Vichitra’ group- a left leaning Marxism based liberal group formed centering a popular Weekly Magazine called ‘Vichitra’ in 1972. There he served as a member of the editorial board ending with Executive Editor in 1992. He was a regular contributor not only of his own Magazine of all important dailies and earned reputation as an analytical and critical columnist. His critical articles created a host friends amongst the humanist liberal and secular circles but equal number of enemies in the establishment as well as among the fundamentalists and communalists.
  • As Shahriar was exposing himself as a BAL supported humanist and activist against human rights violation through his writings exposing the ugly desire and design of seizing power by fundamentalist forces to turn secular-liberal democratic Bangladesh into a theocratic state based on fundamental Islamic principles he became one of the principal target of the Islamite force in Bangladesh. Consequentsty as the part of government side to tackle Bangladesh Jammat Islami, a traditional and democratic political party, started Championing.
  •         This action of trying the accused collaborators in a public tribunal by passing the government system of judiciary antagonized the government of Khaleda Begum. This is because the party in power BNP since its formation in early eighties by late Zia ur Rahman, an army general of Bangladesh army, and sector commander in our liberation war in 1972 was harbouring good relations with the Islamic parties including the Jamaat e Islami. In fact General Zia after assuming power rehabilitated the fundamentalists in the body politic of Bangladesh. Golum Azam was brought back by his initiative, and later on the government of Khaleda Begum did everything to return citizenship to Mr. Azam. It was therefore no wonder that public trial of Mr. Azam was taken seriously by the Khaleda government, which was at that time trying to protect the interest of the Jamat chief. All elite of the society involved in the proceedings of the trial including Mr. Shahriar Kabir were arrested by Khaleda government in nineties with sedition charge- all of them were termed as anti-state elements. Al though these elite citizens were harassed in public but were not put behind the bar as the learned high court granted bails to them. The case was finally dropped after a couple of years when a new caretaker government came to power under a retired chief justice replacing the BNP government which was forced to resign because of mass uprising against it.




सोमवार, 8 अगस्त 2011

Prakash Javdekar " Spokes person BJP"

  प्रकाश जावडेकर "प्रवक्ता भाजपा "

1. ब्रह्मपुत्र पर बनाया जाने वाला बांध आजकल बहुत चर्चा में है ,आपकी इस विषय में क्या राय है ?
* चीन हमेशा से आक्रामक रहा है ,वह भारत के विरुद्ध कुछ न कुछ खुराफात करता रहता है ,जैसे अलगाववादियों को सहयोग ,तिब्बत पर दबाव ,यंहा तक की उसने भारत का जो नक्शा बना है उसमे कश्मीर को अलग दिखाया है.ब्रह्पुत्र पर बांध भी उसकी नई साजिशों  में से एक है.भारत सरकार को उसकी साजिशों का दो टूक जवाब देना चाहिए जो वो नहीं दे रहा है. 
२. भारतीय जनता पार्टी इस दिशा में क्या कर रही है?
*भाजपा हमेशा ही देश हित में कम करती है.ब्रह्मपुत्र के ऊपर बांध  बनाने  की खबर जबसे राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय मीडीया के दवारा लोगो के बीच में आई है ,हमलोगों ने तुरंत इस बारे में पत्र लिख कर प्रधानमंत्री से पूछा ,जिस पर उन्होंने कहा की ऐसी कोई बात नहीं है . हमलोग पहले भी संसद में इस विषय पर चर्चा कर चुके है .आगे भी हम सदन में मांग रखेंगे की चीन कुछ कर रहा है या नहीं उस पर स्पष्टीकरण दिया जाये .
३. आप ब्रह्मपुत्र के बारे में क्या सोचते है ?
*ब्रह्मपुत्र से हमारा इतिहास व् संस्कृति जुडी हुयी है, जिस तरह भागीरथ गंगा को पृथ्वी पर लाये थे उसी तरह ब्रह्मपुत्र भी भारत में आई है .पौराणिक कथाओ के अनुसार ब्रह्मपुत्र,  सृष्टि का सृजन करने वाले देवता ब्रह्मा जी  का पुत्र है, इस नाते उससे भारतीयों की धार्मिक आस्थाये जुडी हुयी है .अगर ब्रह्मपुत्र के पानी का  रुख  चीन बदलने की कोशिश करेंगा तो भारत पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेंगा .भारत की तबाही भी हो सकती है .
४. भारत ने भी फरक्का बांध ' भारत-बंगलादेश सीमा पर बनाया है क्या इसका यही मतलब निकला जाये की बड़ी मछली ,छोटी मछली को खाती है?
*बिलकुल गलत है ,भारत ने बांध बनाया संधि के तहत .उसने अपनी संधि में जितना पानी छोड़ने की बात की वह उसे बराबर दे रहा है.फरक्का बांध की चीन के बांध से तुलना ही नहीं की जा सकती.
५.अगर चीन बांध बनाता है (जैसा की सुना जा रहा है ) तो भारत सरकार क्या करेगी ?

* बांध को रोकने के लिए भारत के पास अनेक मार्ग है .भारत भी उस पर बांध को रोकने के लिए चीन पर दबाव डालेंगा .
६.चीन पर दबाव डालने के लिए सबसे पहले भारत कौन सा मार्ग अपनाएगा ?
 *प्रत्येक देश  एक- दुसरे के ऊपर किसी न किसी माध्यम से निर्भर होता है .चाइना का भी भारत के साथ व्यावसायिक सम्बन्ध है ,इसलिए वो ऐसा नहीं कर सकता है .आज चाइना के 45 हजार मेगावाट पावर पॉइंट भारत में लग रहे है अगर चीन ऐसा करेगा तो उसके पावर पॉइंट भारत में कैसे लग पाएंगे .

२००९ दिसंबर में 
"बांध पर विवाद "   के लिए दिया गया साक्षात्कार 



























गुरुवार, 21 जुलाई 2011

निरंजन मलिक ,लेफ्टिनेंट जनरल (पीवीएसएम् )

 निरंजन मलिक ,लेफ्टिनेंट जनरल (पीवीएसएम् )

प्रश्न , आपका जन्म कहा हुआ और आप आर्मी में कैसे आये .किसी प्रेरणा से या पारिवारिक प्रष्ठभूमि के कारण ?
  मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक कृषक परिवार में हुआ था मेरे पिताजी कृषक के साथ - साथ सैनिक भी थे .ये हमारे परिवार की परंपरा है की जितने लड़के होंगे  वे आर्मी में जायेंगे .हमारे तीनो भाई आर्मी में अफसर है .और चचेरा भाई भी आर्मी में ही है.
२. आपने  स्कूली शिक्षा  कहा से प्राप्त की ?
*मैंने अपनी प्राम्भिक शिक्षा आर्मी के नामी स्कूल में पाई थी. कालेज की शिक्षा मैंने प्रिंसे ऑफ़ वेल्स रायल इन्डियन मिलिट्री कालेज में जिसे आज " राष्ट्रीय इन्डियन मिलिट्री कालेज देहरादून" के नाम से जाना जाता है वहा से प्राप्त की .इस कालेज में एडमिशन पाने के लिए परीक्षा देनी पड़ती है.मैंने दिल्ली से परीक्षा दी थी उस समय उसमे मात्र एक ही सीट थी, ये जानकर आपको आश्चर्य होगा ,जैसा की मुझे हुआ था की परीक्षा का  रिजल्ट निकलने के बाद मै अकेला ही था जो दिल्ली से पास हुआ था .बाद में मेरे प्रिंसिपल एच सी कैचपाल ने मुझे बताया कि  maithmatics   में मैंने  २००  नंबर में से १९८ पाए थे .जिसके कारण  मुझे अडमिशन मिला था हलाकि मै अंग्रेजी में फेल हो गया था .
३. तब आपने अंग्रेजी सुधारने के लिए क्या किया ?
*ये  बहुत  ही दिलचस्प न भूलने वाली स्मृति है .कालेज के standard   की अंग्रेजी जानने के लिए हमें बहुत मेहनत करनी पड़ी .जंहा कालेज में सभी मस्ती करते थे वहा मै खली समय में अंग्रेजी के नावेल पढ़ा करता था .क्योकि मेरे सेक्शन के टीचर मिस्टर वाटसन जो साइंस पढ़ाते थे और बहुत ही अच्छे इन्सान थे उन्होंने मुझसे कहा की अंग्रेजी सीखने के लिए नावेल पढना आवश्यक है और साथ ही निर्देश दिया की प्रत्येक सप्ताह तुम्हे एक नया नावेल पढना है और रविवार को मेरे साथ उस पर चर्चा करनी है .तब मुझे ये किसी सजा से कम नहीं लगता था कि मै खाली समय में नावेल लेकर बैठा हूँ .जबकि मेरे साथ के केडेट  खेलते थे किन्तु इसका फायदा ये हुआ कि मै किताबे पढने का शौकीन हो गया .इसके बाद जब मैंने  सीनियर  cambridge फायनल परीक्षा दी तब मुझे तीन विषयो  गणित,इतिहास ,अंग्रेजी में distinction  मिली जिसका श्रेय मै आजतक अपने प्रिंसिपल और टीचर को देता हूँ. 
४. आपके अनुसार stratgic  blunder  क्या है?
भारत वो देश है जिसने मोर्याँ और गुप्ता पीरियड का स्वर्णकाल देखा है. भारत कि गौरवपूर्ण परंपरा में शासक सुचारू रूप से शासन चलने में सक्षम थे .इनकी शासन प्रणाली सुन्दर इमारतो का निर्माण, वैज्ञानिक पद्धति, साफ-सफाई सभ्यता ने पुरे संसार में भारत कि पहचान करायी थी. किन्तु लम्बे समय की  गुलामी ने एक प्रश्न  चिन्ह लगा दिया था कि "क्या भारत सक्षम होगा एक राष्ट्र के रूप में पहचान बनाने में ?" और आज साथ वर्षो बाद भी एक प्रश्न लोगो को मैथ रहा है कि "क्या भारत सुपर पावर बन जायेगा ?" हालाँकि आज भारत में कुटनीतिक दृष्टिकोण में कमी आई है .राष्ट्र के प्रति लोगो में लगाव नहीं रह गया .सुरक्षा व्यवस्था ठीक नहीं है और न ही सही योजनाये क्रियान्वित कि गयी है .खस्ता सुरक्षा के चलते हमारे पडोसी राज्यों ने हमारे ऊपर प्रेशर दल कर रखा है .उनके द्वारा भारत को दिए गए घाव रिस रहे है .गजनी के समय से जब उसने सत्रह बार आक्रमण कर देश को लुटा था और रक्तपात किया था आज तक भारत विदेशी आक्रमण रोकने में या जवाब देने में असमर्थ है.
५. जिस असुरक्षा कि आप बात कर रहे है ,क्या उसका कारण सेना का सशक्त न होना है.? 
* नहीं हमारी सेना बहुत सशक्त है,लेकिन नई रणनीति के तहत जिस तरह का संग्राम द्वीपों में दिख रहा है ,उसके लिए सेना तैयार नहीं है .
६. आपके अनुसार क्या केंद्र सरकार दोषी है जिसे सेना की समस्याये और देश की सुरक्षा नहीं दिख रही है ?
*बिलकुल हमारी केंद्र सरकार सुरक्षा के प्रति लापरवाह है .किन्तु जब श्री अटल बिहारी बाजपई जी प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने देश की सुरक्षा को सबसे अधिक प्राथमिकता दी थी .पोखरण परमाणु परीक्षण   हमारी सैन्य शक्ति में इजाफा किया था.
७. आपको सबसे अधिक क्या बात दुखित करती है ?
*मै  अवकाश प्राप्त सैनिक हूँ और जब अपने चारो तरफ देखता हूँ तो पाता हूँ कि राजनेता हमारे देश कि सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं सोच रहे है . बदले हुए माहौल  में हमें अत्याधुनिक हथियारों की आवश्यकता है जिससे कि हम अपने शत्रुओ से निपटने में उनसे एक कदम आगे रह सके .इसके अतिरिक्त हमें अपने शत्रु को पहचानना होगा और उनके कार्य करने के तरीके को चाहे वे पाकिस्तानी हो या चीनी .सिर्फ राजनीतिग  तरीके से बात  करके और पेपरों में लिख क्र ,आश्वासन देकर अपने कार्य को समाप्त कर देना सही नहीं है .जिस तरह से पाकिस्तान कभी भी अपनी बात पर कायम नहीं रहता .इधर चीन भी भारत के साथ सही तरीके से पेश नहीं आ रहा है और अरुणाचल पर अपना दावा जाता रहा है .उससे पाकिस्तान और चीन दोनों के इरादे स्पष्ट समझ में आ रहे है .किन्तु हम सच्चाई से मुहं मोड़ कर एक झूठे सवर्ग में रहते है जिसकी बहुत बड़ी कीमत हमें भविष्य में चुकानी पद सकती है .
८.क्या आप अपने देशवासियों को कोई सन्देश देना चाहेंगे ?
* जरुर , मै कहना चाहूँगा मेरे भारतवासियों ये समय सोने का नहीं वरन होश में आने का है .हमारे देश को बहर और भीतर दोनों तरफ से खतरा है ,उसे धमकिया मिल रही है और जिस सरकार को लोक्तार्न्त्रिक तरीके से आप चुनकर लाये है वो बहुत गहरी नींद में है .हमें ये नही भूलना चाहिए कि जब तक आपका देश सैन्य शक्ति में सबसे ऊपर नहीं होगा कोई भी देश आपसे भय नहीं खायेगा .कहा भी गया है कि " भय बिन होए न प्रीत "आर्थिक दृष्टिकोण से सक्षम बन्ने से आप ऊपर नहीं उठ सकते .पैसा ऐश करा सकता है लेकिन सुरक्षा नहीं दे सकता .इसलिए कही ऐसा न हो कि हमारी गलतियाँ हमें फिर से गुलामी का इतिहास दोहराने के लिए मजबूर कर दे